एक रंग अपना भी देखा है मैंने..!!♥♥

~¤Akash¤~

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आशाओं के परों पर कुछ सपने बुने है मैंने..
कुछ कच्चे से..कुछ पक्के से..तो कुछ अधूरे से रखे है मैंने..

कुछ रंगों की फीकी सी चमक है..तो कहीं दीवारों में तस्वीर बनाये है मैंने..
महकती भी है फूलों की बगिया कहीं..तो कहीं अन्धेरें में एक दीप जलाया हैं मैंने..

शांत सी हवाएं भी गुजरती है छुकर कहीं..तो कहीं पतझड़ की आहटें भी सुनी है मैंने..
खुली आँखों से मिलती हैं राहें किसी की..तो कहीं रास्ते पर चेहरें अजनबी से देखे हैं मैंने..

ओस से भीगी सड़कों को देखा..तो कही अश्कों से भीगा एक फुल देखा है मैंने..
अनजाने से सफ़र में चलना फिर..तो कहीं सांझ की चादर को सिहरतें देखा हैं मैंने..

जो गीत चुनकर रखे है कहीं..तो फिर आज उनमे एक गुलाब सुखा देखा हैं मैंने..
कुछ प्रेम की..कुछ उदासी की..तो कुछ सतरंगी सपनो की दुनिया में...

एक रंग अपना भी देखा है मैंने..!!♥♥
 
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