साहिब सिंह ने कराया था श्री हेमकुंट साहिब &#23

मोहाली. श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के तपोस्थान श्री हेमकुंट साहिब में जो गुरुद्वारा निर्मित है, वह इंग्लैंड में बसे एक सिख श्रद्धालु के दिमाग की उपज है। पहले उन्होंने इसे कागज पर उतारा फिर दिल्ली के परेड ग्राउंड में गुरुद्वारा साहिब का ढांचा तैयार कर उस पर मार्किग की।

इसी ढांचे को बाद में चंडीगढ़ के बाबा साहिब सिंह ने श्री हेमकुंट साहिब में ले जाकर गुरुद्वारा साहिब के स्वरूप में स्थापित कर दिया, जो आज करोड़ों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। साहिबसिंह के बेटे मदन मोहनसिंह चावला वर्तमान में श्री हेमकुंट साहिब ट्रस्ट के ट्रस्टी है। यह जानकारी पड़ौल में श्री हेमकुंट वैली स्थित गुरुद्वारे के मैनेजर सेवा सिंह ने दी।

हेमकुंट पर्वत है जहां, सप्तश्रृंग शोभित है तहां

यह पंक्ति सामने आते ही एक आलौकिक और विहंगम दृश्य मन में आ जाता है। समुद्रतल से करीब 4000 मीटर उंचाई पर स्थित श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा प्राकृतिक रूप से बनी बर्फीली झील के किनारे स्थित है। इनके दर्शनों के लिए साल में मात्र 4 महीने ही संगतें यहां पहुंच पाती है बाकी दिनों यहां आने वाले रास्ते पर बर्फ जमी रहती है।

श्री हेमकुंट साहिब में स्थित गुरुद्वारे को इस खूबसूरती से बनाया गया है कि जो भी इसके दर्शन करता है वह कुछ समय के लिए तो उन हाथों को सलाम जरूर करता है जिसने इसे अपनी देखरेख में बनाया होगा। गुरदर्शन के लिए जाते श्रद्धालु दुर्गम रास्तों से होकर जब गुजरते हैं, तो उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हजारों टन लोहे और अन्य भारी चीजों से निर्मित गुरुद्वारा साहिब को बनाने में किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा होगा यह तो इसे बनाने वाले ही जानते होंगे।

शहर से आज भी जाती है रसद

सेवा सिंह ने बताया कि श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा ट्रस्ट की ओर से पड़ौल में जमीन ली गई है, जहां से आलू ,प्याज सहित विभिन्न प्रकार की रसद हर साल भेजी जाती है। श्री हेमकुंट साहिब के लिए यहां से इस बार आम का आचार भी भेजा जा रहा है।

बर्फीले व पहाड़ी माहौल के अनुसार बना

सेवा सिंह ने बताया कि श्री हेमकुंट साहिब में पहले गुरुद्वारा साहिब का निर्माण छोटे आकार का था। यहां बड़ा गुरुद्वारा बनाने की मंशा से इंग्लैंड निवासी मनमोहन सिंह स्याली के मन में ख्याल आया तो उन्होंने इंग्लैंड में रहकर श्री हेमकुंट साहिब जैसे बर्फीले वातावरण के हिसाब से गुरुद्वारा साहिब का नक्शा वहीं तैयार किया। इस मैप को पूरी तरह से साकार रूप देने में चंडीगढ़ के साहिब सिंह का पूरा योगदान रहा।

साहिब सिंह ने अपनी पूरी लगन, मेहनत और तजूर्बे से कारीगरों की मदद से जुलाई 68 में ढांचे का निर्माण शुरू किया। विपरीत परिस्थितियों में काम करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करते हुए हजारों टन लोहे के चैनल, गार्डर, अल्यूमिनियम सीट ,वाटरप्रूफ प्लाई सहित कई तरह के सामान से निर्मित इसे बनाने में 5 साल से अधिक समय लगा। इस पर भूचाल का किसी प्रकार का कोई असर नहीं होता। हिमालय की पहाड़ियों से घिरे श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारे के पास स्थित पवित्र कुंड की चौड़ाई करीब 3 किलोमीटर के करीब है जबकि इसकी गहराई का कोई लेखा जोखा नहीं है।
 

@n@@m

unknown but known to all
Re: साहिब सिंह ने कराया था श्री हेमकुंट साहिब

Nice :jsm
 

wireless

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Re: साहिब सिंह ने कराया था श्री हेमकुंट साहिब

bahut vadiya jankari veer ji
 
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