मानवरहित फाटक बना तीन का काल

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भोगपुर के निकट चक्क सकूर मोड़ के पास मानवरहित फाटक पर शुक्रवार सुबह एक कंपनी की मिनी बस हिमगिरी एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आ गई। हादसे में कारगिल युद्ध में शहीद हुए सिपाही की पत्नी व बेटे समेत तीन लोगों की मौत हो गई। दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ये लोग बस में सवार थे।
जम्मू से हावड़ा जा रही हिमगिरी एक्सप्रेस 2332 सुबह करीब 8:40 बजे चक्क सकूर गांव के पास पहुंची। उसी वक्त भोगपुर की ओर जा रही सुखमणि कंपनी की बस मानवरहित फाटक को पार कर रही थी। बस का चालक ट्रेन को आता नहीं देख सका और तेजी से आती ट्रेन से टकरा कर बस के परखच्चे उड़ गए। बस कई टुकड़ों में बंट गई। बस के हिस्से करीब एक किलोमीटर के दायरे तक बिखर गए, जबकि बस की बाडी रेलवे इंजन में बुरी तरह फंस गई।
संयोगवश बस में चार सवारियां ही मौजूद थी। निकटवर्ती गांव मोकला के शहीद हो चुके जरनैल सिंह की पत्नी बलजीत कौर (35) और उसका बेटा गुरप्रीत सिंह (10) दुर्घटना का शिकार हो गए। बस चालक कुलदीप सिंह पुत्र हरबंस सिंह निवासी गांव दरिया, जिला होशियारपुर की भी मौके पर ही मौत हो गई जबकि बस में सवार गांव जहूरा निवासी सागर पुत्र सतनाम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे जालंधर रेफर किया गया है। एक घायल के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
घटनास्थल पर एसडीएम-2 अनुपम कलेर, एसपी हेडक्वार्टर राजदीप सिंह संधू, जीआरपी जालंधर के एसएचओ गुरनाम सिंह पहुंचे, लेकिन रेलवे प्रशासन का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा। बस को बड़ी जिद्दोजहद कर तीन घंटे बाद जेसीबी मशीन व लोगों की मदद से बाहर निकाल ट्रैक क्लीयर किया गया। जीआरपी थाना जालंधर प्रभारी गुरनाम सिंह ने बताया कि हादसा बस ड्राइवर की लापरवाही के कारण हुआ है।
मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रेन के चालक केवल कृष्ण, सहचालक मिल्खी राम ने गाड़ी को रोकने की बहुत कोशिश की और बार-बार हार्न बजाए, परंतु मिनी बस का चालक अपनी ही धुन में था जिस वजह से बस हादसे का शिकार हो गई। घटना के बाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। जालंधर के गांव मौकला से शहीद जरनैल सिंह की पत्नी व बेटे की मौत की खबर सुन कर पहुंचे उनके परिजनों का विलाप थम नहीं रहा था।
 
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