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ISI के आतंकियों से लिंक, लेकिन सपोर्ट नहीं: US के आरोपों पर बोला PAK



मंगलवार को अमेरिका ने कहा था कि ISI के आतंकियों से लिंक हैं और वह अपनी अलग फॉरेन पॉलिसी चला रही है।



अमेरिका के एक सीनियर जनरल ने मंगलवार को कहा था कि आईएसआई के आतंकियों से रिश्ते हैं। -फाइल

इस्लामाबाद. पाकिस्तान ने मान लिया है कि उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की आतंकियों से लिंक है। हालांकि, पाक आर्मी ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम आतंकी गुटों का सपोर्ट करते हैं। बता दें कि तीन दिन पहले ही अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल जोसेफ डनफोर्ड और डिफेंस मिनिस्टर जिम मैटिस ने कहा था कि आईएसआई के आतंकियों से रिश्ते हैं और उन्हें लगता है कि वह अपनी एक अलग फॉरेन पॉलिसी चला रही है। अमेरिका ने यह नहीं कहा कि हम आतंकियों का सपोर्ट करते हैँ...

- डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल आसिफ गफूर ने गुरुवार को कहा कि लिंक होने और सपोर्ट करने मंे अंतर होता है। किसी ऐसी इंटेलीजेंस एजेंसी का नाम बताइए जिसके संपर्क न हों। लिंक पॉजिटिव हो सकती है।
- उन्होंने कहा कि उन्होंने (जिम मेटिस) ने यह कतई नहीं कहा है कि हम आतंकियों का सपोर्ट करते हैं।
- गफूर रावलपिंडी स्थित आर्मी के जनरल हेडक्वार्टर्स में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसमें उन्होंने कई अहम मुद्दों, जैसे अफगानिस्तान, भारत और अमेरिका से रिश्तों, आंतरिक सुरक्षा और सेना के पब्लिक से रिश्तों जैसे तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई।
फॉरेन मिनिस्ट्री ने खारिज किए US के आरोप
- न्यूज एजेंसी ने डॉन के हवाले से बताया है कि अमेरिका के आरोपों को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है।
- फॉरेन मिनिस्ट्री की स्पोक्सपर्सन नफीस जकारिया ने कहा, "अमेरिकी गवर्नमेंट और आर्मी अफगानिस्तान में अपनी नाकामियों के लिए पाकिस्तान को बलि का बकरा बना रही है।"
- उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकी गुटों के खिलाफ जबर्दस्त तरीके से कार्रवाई कर रहा है।
हाफिज की पार्टी को चुनाव लड़ने की इजाजत
- इस मौके पर उन्होंने कहा कि मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) को चुनाव लड़ने की आजादी है। बता दें कि यह हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा की पॉलिटिकल विंग है। इलेक्शन कमीशन ने एमएमएल के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी।
US के पूर्व अफसर ने भी कहा था- PAK आतंकियों का मददगार
- हाल ही में अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट में पूर्व अफसर माइकल रुबिन ने पाकिस्तान को आतंकियों की मदद करने वाला देश कहा था।
- उन्होंने कहा था कि ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के लिए पाकिस्तान, कतर और तुर्की को आतंकवाद को स्पॉन्सर करने वाले देश डिक्लेयर करने का वक्त आ गया है।
PAK के लिए और क्या कहा था रुबिन ने?
- उन्होंने कहा, "पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों की इस लिस्ट में शामिल होने से लंबे वक्त से बचा हुआ है।"
- रुबिन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लीडर्स खुले तौर पर तालिबान को सपोर्ट करते हैं। इस्लामाबाद लगातार जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी गुट को बर्दाश्त करता रहा है, जिसने टाइम्स स्क्वेयर के बॉम्बर को भर्ती किया। वह लश्कर-ए-तैयबा को सपोर्ट करते हैं, जो 2001 में भारत की संसद पर हुए हमले और 2008 में मुंबई के होटल में सैलानियों का कत्ल करने के लिए जिम्मेदार है। इस बात को भी नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान के अफसरों की जानकारी के बगैर ओसामा बिन लादेन भी पाकिस्तान के एबोटाबाद में रह रहा था।
- उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इन आतंकी गुटों पर कभी-कभी छापेमारी करता है, लेकिन इसमें उन्हें खत्म करने की उसकी मंशा नजर नहीं आती।
 
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