Punjab News अब जेल में कैदी करेंगे कपाल भाति

जल्द ही पंजाब की जेलों में कैदी कपाल भाति और दूसरी योग क्रियाएं करते नजर आएंगे। राज्य की दस जेलों व दस अस्पतालों में योगा सेंटर खोलने के प्रोजेक्ट को केंद्र से डेढ़ साल बाद मंजूरी मिल गई है।

सेहतमंत्री प्रोफेसर लक्ष्मीकांता चावला के हस्तक्षेप पर मंजूरी मिलने के बाद इसे मुकम्मल करने की कवायद शुरू हो गई है। योगा सेंटर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत खोले जाएंगे। योगा सेंटरों के लिए स्वामी विवेकानंद योग एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी बैंगलोर से करार किया जाएगा।

सेंट्रल कौंसिल फॉर योगा एंड नेचुरोपैथी एंड रिसर्च की एक स्कीम के तहत विभिन्न राज्यों में योगा सेंटर खोले जाने हैं। सेंटर के लिए जमीन राज्य सरकार ने मुहैया करानी है, जबकि मैनपावर का खर्च कौंसिल उठाएगी। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, जालंधर व रोपड़ समेत दस जिलों में योगा सेंटर बनाने का प्रपोजल कौंसिल के पास भेजा था।

जब इस स्कीम के बारे में पंजाब के गृह मंत्रालय को पता चला तो आईजी जेल ने स्वास्थ्य मंत्रालय को जेलों में भी योगा सेंटर खोलने का प्रस्ताव दे दिया। उनका कहना था कि इससे कैदियों का मानसिक तनाव घटाने व बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी, जिस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने लुधियाना की सेंट्रल जेल समेत पंद्रह जेलों में सेंटर खोलने का भी प्रस्ताव भेज दिया।

दूसरे राज्यों की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण केंद्र सरकार सितंबर 2009 से पंजाब के प्रोजेक्ट को रोके बैठी थी। केंद्र के पास किसी अन्य राज्य से प्रस्ताव नहीं पहुंचे। बताते हैं कि कौंसिल के अफसरों ने पंजाब सरकार को जवाब दिया कि वे एक ही राज्य को इतने सेंटर दे देंगे तो बाकी राज्यों के हिस्से में क्या आएगा? उधर, काफी इंतजार के बावजूद अन्य राज्यों से कौंसिल के पास प्रस्ताव नहीं पहुंचा।

दो दिन पूर्व सेहतमंत्री ने दिल्ली में केंद्रीय आयुष सचिव के साथ बैठक में मुद्दा उठाया कि दूसरे राज्य प्रस्ताव नहीं भेज रहे तो भला पंजाब का क्या कसूर है। उनके तर्क से सहमत होकर दस जेलों व दस अस्पतालों में योगा सेंटर खोलने की मंजूरी दे दी गई। आयुर्वेद विभाग के डायरेक्टर डा.राकेश शर्मा ने बताया कि केंद्रीय आयुष डिपार्टमेंट ने यूनिवर्सिटी को पंजाब के साथ करार के लिए कह दिया है। हम यूनिवर्सिटी के पत्र का इंतजार कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रबंधन से संपर्क भी किया गया है। उसके बाद जेलों में नियमित तौर पर योगा की क्लासें लगेंगी।

कैदियों को ओपीडी में चेक करना है या फिर दाखिल करके इलाज करना है, यह करार में तय होगा। कैदियों को शूगर, ब्लड प्रेशर समेत अन्य रोगों से बचाव में भी योगा मदद करेगा। मनोचिकित्सक डा.राजीव शर्मा के मुताबिक कईयों में आपराधिक प्रवृति की पर्सनेलिटी डिसआर्डर के कारण होती है। जेलों में कैदी लंबे समय तक परिवार से दूर रहते हैं, इसलिए डिप्रेशन व घबराहट समेत अन्य मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
 

Attachments

Top