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bhoot_hun_mai

@L0nE DuDE
चलो कुछ देर साथ साथ रहा जाए,
चुप रहकर एकसाथ ये दर्द सहा जाए

कैसी कैसी उँच-नीच इस मन के साथ हुआ करती है,
एक दूजे के मन पर चलो मरहम आज लगाया जाए

साथ रहकर भी छिटके से जीते रहे हम सदा
ज्यादा कुछ नहीं तो आंखें ही बस मिलाई जाए ...

इन रिश्तों ने ख्वाबों को भी सख्त सा बना डाला है,
पीले फूलों की नर्म शोखी इन पलकों को दिखाई जाए

ये वक्त की पाबंदिया 05; बेगारी की ज़िन्दगी ...
कुछ पल के लिए तो कहीं ठौर बनाया जाए!

बरसों हुए फूलों की बातें भी किए,
नंगे पांव खेतों में सैर को चला जाए

हम साथ रहे तो सचमुच आसां गुजरता है दिन
चलो इस ज़िन्दगी को साथ साथ जिया जाए ...
 

bhoot_hun_mai

@L0nE DuDE
याद है,
तुम और मैं
पहाड़ी वाले शहर की
लम्बी, घुमावदार,
सड़्क पर
बिना कुछ बोले
हाथ में हाथ डाले
बेमतलब, बेपरवाह
मीलों चला करते थे,
खम्भों को गिना करते थे,
और मैं जब
चलते चलते
थक जाता था
तुम कहती थीं ,
बस
उस अगले खम्भे
तक और ।

आज
मैं अकेला ही
उस सड़्क पर निकल आया हूँ ,
खम्भे मुझे अजीब
निगाह से
देख रहे हैं
मुझ से तुम्हारा पता
पूछ रहे हैं
मैं थक के चूर चूर हो गया हूँ
लेकिन वापस नहीं लौटना है
हिम्मत कर के ,
अगले खम्भे तक पहुँचना है
सोचता हूँ
तुम्हें तेज चलने की आदत थी,
शायद
अगले खम्भे तक पुहुँच कर
तुम मेरा
इन्तजार कर रही हो !
 

bhoot_hun_mai

@L0nE DuDE
तस्वीर की लडकी बोलती है

जिस रात
अँधेरा गहराता है
चाँदनी पिघलती है
मैं हौले कदमों से
कैनवस की कैद से
बाहर निकलती हूँ

बालों को झटक कर खोलती हूँ
और उन घनेरी ज़ुल्फों में
टाँकती हूँ जगमगाते सितारे

मेरे बदन से फूटती है खुश्बू
हज़ारों चँपई फूल खिलते हैं
आँखों के कोरों से कोई
सहेजा हुआ सपना
टपक जाता है

मदहोश हवा में
अनजानी धुन पर
अनजानी लय से
पैर थिरक जाते हैं
रात भर मैं झूमती हूँ

पौ फटते ही
बालों को समेट्ती हूँ
जूडे में...
बदन की खुशबू को ढंकती हूँ
चादर से
पलकों को झपकाती हूँ
और कोई अधूरा सपना
फिर कैद हो जाता है
आँखों में
एक कदम आगे बढाती हूँ
और कैनवस की तस्वीर वाली
लडकी बन जाती हूँ

तुम आते हो
तस्वीर के आगे ठिठकते हो
दो पल
फिर दूसरी तस्वीर की ओर
बढ जाते हो..

मेरे होंठ बेबस, कैद हैं
कैनवस में
बोलना चाहती हूँ..पर..

क्या तुम नहीं देख पाते
तस्वीर की लडकी के
होंठों की ज़रा सी टेढी
मुस्कुरा 61;ट
और नीचे सफेद फर्श पर
गिरे दो चँपई फूल ??
 

bhoot_hun_mai

@L0nE DuDE
जब कभी तेरी याद आती है
चांदनी में नहा के आती है।
भीग जाते हैं आँख में सपने
शब में शबनम बहा के आती है।

मेरी तनहाई के तसव्वुर में
तेरी तसवीर उभर आती है।
तू नहीं है तो तेरी याद सही
ज़िन्दगी कुछ तो संवर जाती है।

जब बहारों का ज़िक्र आता है
मेरे माज़ी की दास्तानो 06; में
तब तेरे फूल से तबस्सुम का
रंग भरता है आसमानों में।

तू कहीं दूर उफ़क से चल कर
मेरे ख्यालों में उतर आती है।
मेरे वीरान बियाबानो 06; में
प्यार बन कर के बिखर जाती है।

तू किसी पंखरी के दामन पर
ओस की तरह झिलमिलात 68; है।
मेरी रातों की हसरतें बन कर
तू सितारों में टिमटिमात 68; है।

वक्ते रुख़सत की बेबसी ऐसी
आँख से आरज़ू अयाँ न हुई।
दिल से आई थी बात होठों तक
बेज़ुबानी मगर ज़ुबां न हुई।

एक लमहे के दर्द को लेकर
कितनी सदियां उदास रहती हैं।
दूरियां जो कभी नहीं मिटतीं
मेरी मंज़िल के पास रहती हैं।

रात आई तो बेकली लेकर
सहर आई तो बेकरार आई।
चन्द उलझे हुये से अफ़साने
ज़िन्दगी और कुछ नहीं लाई।

चश्मे पुरनम बही, बही, न बही।
ज़िन्दगी है, रही, रही, न रही।
तुम तो कह दो जो तुमको कहना था
मेरा क्या है कही, कही, न कही।
 

bhoot_hun_mai

@L0nE DuDE
काश़

ना समझ सका
मैं खुद जिसको
अधखुला राज़
अनकही बात
मैं काश़ तुम्हे समझा पाता

तेरी नज़रों के
दो सवाल
दो प्रश्नचि 44;्ह
जिनके जवाब
मैं काश़ कभी लौटा पाता

कच्चे धागे
इन सपनों के
उलझे उलझे
सुलगे सुलगे
मैं काश़ कभी सुलझा पाता

जुगनू बिखराती
चाँद रात
हाथों में हाथ
दो पल का साथ
मैं काश कभी दोहरा पाता

ख़्वाबों से महकी
सरज़मीं
वो दिलनशीं
कितनी हसीं
मैं काश तुम्हे दिखला पाता

वो गया मोड़
हम साथ छोड़
हैं अलग अलग
इक कड़वा सच
मैं काश इसे झुठला पाता
 

bhoot_hun_mai

@L0nE DuDE
जिक्र बेवफ़ाई का जब किया जाएगा

उसके साथ तेरा नाम लिया जाएगा ।



हाल अच्छा अपना कहें तो किस तरह

जुबां खुलेगी जब जाम पिया जाएगा ।



आलम है कि यहाँ कोई हम सफर नहीं

बात बनेगी जब कहीं दिल दिया जाएगा ।



कहते हैं वो हमसे मिलने की फुर्सत नहीं

तसल्ली है जनाजे पे मिल लिया जाएगा ।



बात की थोड़ी सी और वो रूस्वा हो गए

बनेगी बात कैसे जो न किया जाएगा ।



अभी तो बैठे हैं खयालों में खोए हुए

देखेंगे जो महफिल में याद किया जाएगा ।



उनकी वसीयत थी जनाजे पे न रोए कोई

नई बात नहीं दिल थाम लिया जाएगा ।



मंज़िल की ये दौड़ तो खत्म होने से रही

चलो अब कहीं आराम किया जाएगा ।



उसे खबर है कि उनके इन्तेज़ा 52; में रवि

अपनी जिंदगी यूँ बरबाद किया जाएगा ।
 
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Jaswinder Singh Baidwan Rules - poetry section Punjabi Poetry 1
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