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Urdu Poetry only.

जा के कोई कह दे, शोलों से चिंगारी से फूल इस बार खिले हैं बड़ी तैयारी से बादशाहों से भी फेके हुए सिक्के ना लिए हमने खैरात भी मांगी है .....


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« Mirza Sahiban | ਯੋਗ ਦਿਵਸ »

 

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Old 03-07-2017
jaswindersinghbaidwan
 
Re: Urdu Poetry only.

जा के कोई कह दे, शोलों से चिंगारी से
फूल इस बार खिले हैं बड़ी तैयारी से

बादशाहों से भी फेके हुए सिक्के ना लिए
हमने खैरात भी मांगी है तो खुद्दारी से

Rahat Indori

 
Old 03-07-2017
jaswindersinghbaidwan
 
Re: Urdu Poetry only.

बन के इक हादसा बाज़ार में आ जाएगा
जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा

चोर उचक्कों की करो कद्र, की मालूम नहीं
कौन, कब, कौन सी सरकार में आ जाएगा

Rahat Indori

 
Old 03-07-2017
jaswindersinghbaidwan
 
Re: Urdu Poetry only.

इश्क में पीट के आने के लिए काफी हूँ
मैं निहत्था ही ज़माने के लिए काफी हूँ

हर हकीकत को मेरी, खाक समझने वाले
मैं तेरी नींद उड़ाने के लिए काफी हूँ

एक अख़बार हूँ, औकात ही क्या मेरी
मगर शहर में आग लगाने के लिए काफी हूँ

Rahat Indori


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