UNP

मिट्टी

वेख फरीदा मिट्टी खुल्ली, (कबर) मिट्टी उत्ते मिट्टी डुली; (लाश) मिट्टी हस्से मिट्टी रोवे, (इंसान) अंत मिट्टी दा मिट्टी होवे (जिस्म) ना कर बन्दया मेरी मेरी, (पैसा) ना ऐह तेरी .....


Go Back   UNP > Poetry > Punjabi Poetry > Hindi Poetry

UNP

Register

  Views: 813
Old 18-07-2018
Dhillon
 
Post मिट्टी

वेख फरीदा मिट्टी खुल्ली, (कबर)
मिट्टी उत्ते मिट्टी डुली; (लाश)
मिट्टी हस्से मिट्टी रोवे, (इंसान)
अंत मिट्टी दा मिट्टी होवे (जिस्म)
ना कर बन्दया मेरी मेरी, (पैसा)
ना ऐह तेरी ना ऐह मेरी; (खाली जाना)
चार दिना दा मेला दुनिया, (उम्र)
फ़िर मिट्टी दी बन गयी ढेरी; (मौत)
ना कर एत्थे हेरा फेरी, (पैसे के कारण बेईमानी)
मिट्टी नाल ना धोखा कर तू, (लोका नाल फरेब)
तू वी मिट्टी मैं वी मिट्टी; (इंसान)
जात पात दी गल ना कर तू,
जात वी मिट्टी पात वी मिट्टी, (पाखंड)
जात सिर्फ खुदा दी उच्ची,
बाकी सब कुछ मिट्टी मिट्टी।

-बाबा फरीद

 
Old 01-09-2018
Mani_J
 
Re: मिट्टी



Reply
« Krishn Kanhaiya with Translation - Hafeez Jalandhari | .गजल »

Similar Threads for : मिट्टी
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किस
मैं क्यों भागूं..मिट्टी तो तूने फेकी है..
Punjab News बोरियों में गेहूं के साथ मिट्टी!

Contact Us - DMCA - Privacy - Top
UNP