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.गजल जफ़ा की चोट से दिल टूट कर जब भी बिखर जाए i कि फिर बदनाम होती है वफ़ा, उल्फत जिधर जाए i मुझे एहसास है घर में कोई पहिचानता .....


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Old 20-07-2018
R.B.Sohal
 
.गजल

.गजल
जफ़ा की चोट से दिल टूट कर जब भी बिखर जाए i
कि फिर बदनाम होती है वफ़ा, उल्फत जिधर जाए i
मुझे एहसास है घर में कोई पहिचानता मुझको,
यह आइना देखकर मेरी उम्र यूहीं गुज़र जाए i
मेरी यह ज़िन्दगी की नाव है चाहे बहुत जर्जर,
गमों के पर समंदर की यह लहरों में उतर जाए i
यह नफ़रत,आंधियाँ खेलें घरों पर बिज़लियाँ गिरती,
बताओ तुम चमन वालो किधर सहमा नगर जाए i
किसी भी सफ़र पर अपनी कि अब मर्जी नहीं चलती,
हवाएं रूख जिधर कर लें उधर हर इक बशर जाए i
हक़ीकत को बयाँ करके ये सच ही जीतता अक्सर,
कि सच के कठघरे बीतर ये झूठा बयान डर जए i
मेरी गुम सुम है परछाई रहे यह जिंदगी तन्हा,
बहुत हंसती है तन्हाई मुझे जब देखकर जाए i
रहे जुम्मन का घर जलता अगर गलती है बाबर की,
यह मंज़र मंज़र हर तरफ देखूं जिधर मेरी नज़र जाए i
मेरी जब कल्पना उड़ कर है करती ख़ोज बिन्बों की,
ख्यालों की बुलंदी से यह तब शायरी निखर जाए i
आर.बी.सोहल

 
Old 21-07-2018
kit walker
 
Re: .गजल


 
Old 01-09-2018
Mani_J
 
Re: .गजल



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